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Abhijeet Dipke का दशहरे पर बड़ा संदेश: CJP आंदोलन में विरोध-प्रदर्शन पर विराम के संकेत, Ashutosh Ranka और Saurav Das को बताया ‘असली नेता’

On: October 21, 2026 1:07 AM
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CJP: दशहरे के त्योहार के बीच Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने समर्थकों के नाम एक भावुक संदेश जारी किया है। उन्होंने आंदोलन से जुड़े लोगों से कुछ दिनों तक अपने परिवार के साथ समय बिताने, जेल में बंद साथियों आशुतोष रांका और सौरव दास के लिए प्रार्थना करने और नफरत से दूर रहने की अपील की। उनके इस संदेश को आंदोलन के विरोध-प्रदर्शनों में अस्थायी विराम के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

दिपके का यह संदेश ऐसे समय आया है, जब CJP के दो प्रमुख प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास न्यायिक हिरासत में हैं। दोनों की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन से जुड़े समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच चिंता बनी हुई है। अपने करीब 16 मिनट के वीडियो संदेश में दिपके ने आंदोलन में शामिल लोगों का धन्यवाद किया और कहा कि शांति, करुणा और एक-दूसरे के प्रति प्रेम ही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत हैं।

उन्होंने रांका और दास को आंदोलन का असली नेतृत्वकर्ता बताते हुए कहा कि उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। साथ ही, उन्होंने उन आलोचकों पर भी सवाल उठाए, जो CJP के विरोध-प्रदर्शनों की तुलना नेपाल, बांग्लादेश और फ्रांस में हुए हिंसक प्रदर्शनों से कर रहे हैं। यह घटनाक्रम दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच सामने आया है।

दशहरे पर समर्थकों से क्या बोले अभिजीत दिपके?

20 अक्टूबर 2026 को जारी अपने संदेश में अभिजीत दिपके ने समर्थकों से अपील की कि वे कुछ दिनों तक अपने परिवार और प्रियजनों के साथ समय बिताएं। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए परिवार का साथ भी महत्वपूर्ण है, खासकर ऐसे समय में जब कई कार्यकर्ता विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए और कुछ को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। दिपके ने अपने संदेश में कहा कि आंदोलन का उद्देश्य नफरत का जवाब नफरत से देना नहीं है। उनके मुताबिक, यदि आंदोलन के समर्थक उन्हीं भावनाओं के प्रभाव में आ जाएंगे, जिनका वे विरोध कर रहे हैं, तो वे अपने मूल सिद्धांतों से भटक सकते हैं। उन्होंने समर्थकों से शांति, प्रेम और करुणा बनाए रखने का आग्रह किया। उनका कहना था कि आंदोलन की पहचान उसके शांतिपूर्ण तरीकों और आपसी सहयोग से होनी चाहिए, न कि गुस्से या बदले की भावना से।

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इस संदेश में दिपके ने आशुतोष रांका और सौरव दास के परिवारों से बातचीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दोनों के परिवारों ने समर्थकों से चिंता न करने को कहा था। दिपके ने यह भी स्वीकार किया कि आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए मौजूदा स्थिति भावनात्मक रूप से कठिन है। उनकी अपील का एक प्रमुख हिस्सा यही था कि त्योहार के दौरान कार्यकर्ता अपने परिवारों के साथ समय बिताएं। हालांकि, उन्होंने आंदोलन को स्थायी रूप से समाप्त करने की घोषणा नहीं की। उनके बयान को विरोध-प्रदर्शनों में कुछ दिनों के संभावित विराम के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

Ashutosh Ranka और Saurav Das को बताया आंदोलन का ‘असली नेता’

दिपके के संदेश का सबसे चर्चित हिस्सा वह था, जिसमें उन्होंने आशुतोष रांका और सौरव दास को आंदोलन का असली नेता बताया। उन्होंने कहा कि बाहर से देखने वाले लोगों को भले ही वे आंदोलन का प्रमुख चेहरा नजर आते हों, लेकिन आंदोलन को आगे बढ़ाने में रांका और दास की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।

दिपके ने अपने बयान में कहा कि वह कई मामलों में दोनों के निर्देशों का पालन करते रहे हैं। उन्होंने उनकी निर्णय लेने की क्षमता और आंदोलन में योगदान की प्रशंसा की। उनके मुताबिक, दोनों ने इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

उन्होंने विशेष रूप से सौरव दास का जिक्र करते हुए कहा कि हिरासत और अदालत की कार्यवाही के दौरान भी वह मुस्कुराते हुए दिखाई दिए। दिपके ने इस व्यवहार को उनके धैर्य और दृढ़ता के उदाहरण के रूप में पेश किया।

यह बयान इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि किसी आंदोलन के संस्थापक द्वारा अपने साथियों को नेतृत्व का श्रेय देना आम राजनीतिक चर्चाओं से अलग नजर आता है। दिपके ने अपने संदेश में यह भी कहा कि बेहतर निर्णय लेने वाले लोगों को नेतृत्व में आगे देखना उनके लिए असहजता का विषय नहीं है। हालांकि, किसी आंदोलन में नेतृत्व किसका है, यह केवल एक बयान से तय नहीं होता। दिपके की टिप्पणी उनके व्यक्तिगत आकलन और दोनों साथियों के प्रति सम्मान को दर्शाती है। CJP की संगठनात्मक संरचना या भविष्य के नेतृत्व को लेकर इस संदेश में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई।

‘नफरत का जवाब नफरत से नहीं देंगे’: आंदोलन की रणनीति पर जोर

दिपके ने अपने संदेश में बार-बार शांति, प्रेम और करुणा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े लोगों को उन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर टिके रहना चाहिए, जब वे खुद को अन्याय का सामना करते हुए महसूस कर रहे हों।

उन्होंने आरोप लगाया कि रांका और दास के साथ हुई कार्रवाई का असर आंदोलन के समर्थकों को उकसाने के रूप में भी पड़ सकता है। दिपके के अनुसार, आंदोलन के लोगों को ऐसी परिस्थितियों में भी नफरत या हिंसा की राह नहीं अपनानी चाहिए।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि कार्रवाई को लेकर दिपके के बयान उनके अपने आरोप और राजनीतिक दृष्टिकोण हैं। संबंधित अधिकारियों की ओर से की गई कार्रवाई का कानूनी आधार और उससे जुड़ी प्रक्रिया अलग विषय हैं। इसलिए उनके आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि आंदोलन के संस्थापक की प्रतिक्रिया के रूप में समझना चाहिए।

दिपके ने अपने साथियों के जेल में रहने को महात्मा गांधी के सत्याग्रह से जोड़कर भी देखा। उन्होंने कहा कि उनके साथी कठिन परिस्थितियों के बावजूद शांतिपूर्ण रास्ते पर बने हुए हैं। यह तुलना दिपके की अपनी व्याख्या थी, जिसके जरिए वह आंदोलन के अहिंसक स्वरूप पर जोर देना चाहते थे।

उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि CJP नेतृत्व फिलहाल समर्थकों को संयम बनाए रखने और आंदोलन की सार्वजनिक छवि को शांतिपूर्ण रखने का संदेश देना चाहता है। हालांकि, भविष्य में विरोध-प्रदर्शन किस रूप में आगे बढ़ेंगे, इस बारे में कोई निश्चित कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया।

आशुतोष रांका और सौरव दास जेल में क्यों हैं?

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास की हिरासत इस पूरे घटनाक्रम का अहम हिस्सा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, दोनों को 13 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर कथित रूप से अतिक्रमण करने और शांति भंग करने से संबंधित आरोप लगाए गए थे।

रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों को 14 अक्टूबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बाद में 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन के लिए और बढ़ा दी गई। इस घटनाक्रम के बाद CJP समर्थकों और आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच उनकी रिहाई को लेकर चिंता बनी हुई है।

दिपके ने अपने संदेश में दोनों के परिवारों से बातचीत का उल्लेख करते हुए समर्थकों को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि उन्हें घबराने के बजाय धैर्य बनाए रखना चाहिए। उन्होंने दोनों को आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और कहा कि उनकी अनुपस्थिति से आंदोलन के समर्थकों को अपने सिद्धांत नहीं छोड़ने चाहिए।

यह मामला केवल दो नेताओं की हिरासत तक सीमित नहीं है। इसके साथ विरोध-प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और प्रदर्शन स्थलों पर लागू नियमों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन मुद्दों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित कानूनी प्रक्रिया और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।

CJP का विरोध-प्रदर्शन किस मुद्दे को लेकर हो रहा है?

Cockroach Janta Party का आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है। पार्टी और आंदोलन से जुड़े समर्थकों ने उनके कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर भी विरोध किया जा रहा है।

दिपके ने अपने वीडियो संदेश की शुरुआत आंदोलन में भाग लेने वाले लोगों को धन्यवाद देते हुए की। उन्होंने उन समर्थकों का जिक्र किया, जिन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि SIR को लेकर CJP द्वारा लगाए गए आरोप और निर्वाचन प्रक्रिया के बारे में आधिकारिक पक्ष अलग-अलग हो सकते हैं। आरोपों की सत्यता का निर्धारण संबंधित दस्तावेजों, निर्वाचन आयोग के जवाब और आवश्यक होने पर कानूनी समीक्षा के आधार पर किया जाना चाहिए।

फिलहाल, दिपके के संदेश में आंदोलन की मांगों को वापस लेने या मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग समाप्त करने की घोषणा नहीं की गई है। उनका जोर समर्थकों के व्यवहार, शांतिपूर्ण तरीकों और हिरासत में बंद साथियों के प्रति एकजुटता पर रहा।

दूसरे देशों के हिंसक प्रदर्शनों से तुलना पर दिपके की प्रतिक्रिया

दिपके ने अपने संदेश में उन आलोचकों पर भी निशाना साधा, जो CJP के विरोध-प्रदर्शनों की तुलना नेपाल, बांग्लादेश और फ्रांस में हुए हिंसक प्रदर्शनों से कर रहे हैं। उन्होंने इस तरह की तुलना पर आपत्ति जताई और कहा कि रांका और दास ने हिरासत के दौरान भी शांति और करुणा का रास्ता चुना।

उनका तर्क था कि आंदोलन को उसके घोषित सिद्धांतों और वास्तविक गतिविधियों के आधार पर समझा जाना चाहिए। हालांकि, किसी भी विरोध-प्रदर्शन की प्रकृति का मूल्यांकन करने के लिए घटनाओं, पुलिस के रिकॉर्ड, प्रदर्शनकारियों के व्यवहार और उपलब्ध स्वतंत्र रिपोर्टों को देखना आवश्यक होता है।

दिपके का बयान ऐसे समय आया है, जब CJP के प्रदर्शन और उसके नेताओं की हिरासत राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक पक्षों की राय सामने आ सकती है। इसलिए किसी एक पक्ष की टिप्पणी को पूरी घटना का अंतिम विवरण मानने के बजाय सभी उपलब्ध तथ्यों पर ध्यान देना जरूरी है।

‘असली नेता’ वाले बयान के बाद दिपके ने फिर क्या कहा?

रांका और दास को आंदोलन का असली नेता बताने वाला वीडियो सामने आने के बाद दिपके ने एक और वीडियो जारी किया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों साथियों को खुद से बेहतर नेता और बेहतर इंसान मानने में उन्हें कोई परेशानी नहीं है।

उन्होंने उन लोगों की आलोचना की, जिन्होंने उनके पहले बयान को आंदोलन की जिम्मेदारी दूसरों पर डालने या खुद को उससे अलग करने की कोशिश के रूप में देखा था। दिपके ने कहा कि वह ऐसा नेतृत्व नहीं चाहते, जिसमें केवल उनकी बात को सही माना जाए या उनके निर्णय पर सवाल न उठाए जा सकें।

उनका कहना था कि यदि उनके साथ ऐसे लोग हैं, जो बेहतर सोच सकते हैं और बेहतर निर्णय ले सकते हैं, तो यह उनके लिए गर्व की बात है। इस स्पष्टीकरण से उन्होंने अपने पहले बयान का आशय स्पष्ट करने की कोशिश की। इस घटनाक्रम ने CJP के भीतर नेतृत्व और सामूहिक निर्णय लेने की भूमिका पर भी चर्चा शुरू की है। हालांकि, दिपके के बयान से संगठन की औपचारिक नेतृत्व व्यवस्था में किसी बदलाव की पुष्टि नहीं होती।

आगे क्या होगा CJP आंदोलन का?

दिपके के दशहरे संदेश से संकेत मिलता है कि वह समर्थकों को कुछ दिनों तक परिवार के साथ समय बिताने और संयम बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन इसे आंदोलन की समाप्ति या निश्चित अवधि के लिए आधिकारिक रोक की घोषणा नहीं माना जा सकता। आगे की दिशा कई बातों पर निर्भर कर सकती है, जिनमें रांका और दास की हिरासत से जुड़ी कानूनी कार्यवाही, संगठन की अगली रणनीति और समर्थकों की प्रतिक्रिया शामिल हैं। फिलहाल उपलब्ध बयान में कोई निश्चित अगला प्रदर्शन, तारीख या कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है।

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इस बीच दिपके का मुख्य संदेश यह है कि आंदोलन के समर्थक अपने उद्देश्य के साथ जुड़े रहें, लेकिन नफरत या हिंसा को अपनी पहचान न बनने दें। उन्होंने परिवारों के साथ समय बिताने और अपने साथियों के लिए प्रार्थना करने की अपील भी की। अभिजीत दिपके का दशहरे पर दिया गया संदेश CJP आंदोलन के मौजूदा दौर में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। इसमें समर्थकों को कुछ दिनों का विराम लेने का संकेत, हिरासत में बंद आशुतोष रांका और सौरव दास के प्रति समर्थन और शांतिपूर्ण तरीकों पर जोर दिया गया। दोनों को ‘असली नेता’ बताने वाले बयान के बाद दिपके ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि वह बेहतर नेतृत्व क्षमता वाले साथियों को स्वीकार करने में संकोच नहीं करते। अब आंदोलन की अगली दिशा और दोनों नेताओं से जुड़ी कानूनी कार्यवाही पर नजर रहेगी।

Disclaimer: यह लेख 20 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित समाचार रिपोर्टों और अभिजीत दिपके के सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। इसमें आंदोलन, निर्वाचन प्रक्रिया और हिरासत से संबंधित विवादित दावों को संबंधित पक्षों के बयान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। आरोपों को न्यायिक या आधिकारिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। घटनाक्रम में आगे बदलाव होने पर जानकारी अपडेट हो सकती है।

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