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PM Vishwakarma Yojana में किन लोगों को मिलता है लाभ?

On: October 29, 2026 6:27 PM
PM Vishwakarma Yojana

PM Vishwakarma Yojana का लाभ उन पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को दिया जाता है, जो अपने हाथों और औजारों की मदद से काम करते हैं। इसके लिए व्यक्ति का किसी ऐसे पारंपरिक पेशे से जुड़ा होना जरूरी है, जिसे सरकार ने योजना में शामिल किया है। साथ ही, आवेदक को निर्धारित आयु और स्वरोजगार से जुड़ी शर्तों को भी पूरा करना होता है।

योजना के तहत बढ़ई, नाव बनाने वाले, लोहार, सुनार, कुम्हार, मूर्तिकार, राजमिस्त्री, मोची, नाई, धोबी, दर्जी, मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले और पारंपरिक खिलौने बनाने वाले कारीगर आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, ताला बनाने वाले, औजार बनाने वाले, टोकरी या चटाई बनाने वाले, झाड़ू बनाने वाले, कॉयर बुनने वाले, मालाकार और शस्त्र बनाने से जुड़े निर्धारित पारंपरिक पेशे भी इसमें शामिल हैं।

इस योजना में कुल 18 पारंपरिक ट्रेड शामिल हैं। केवल किसी पेशे में रुचि रखने से पात्रता नहीं बनती, बल्कि आवेदक का पंजीकरण के समय संबंधित काम में सक्रिय होना भी जरूरी है। इसलिए आवेदन करने से पहले यह जांच लेना चाहिए कि आपका काम योजना की आधिकारिक सूची में शामिल है या नहीं।

PM Vishwakarma Yojana की पात्रता की प्रमुख शर्तें

PM Vishwakarma Yojana के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति की उम्र पंजीकरण के समय कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। आवेदक को योजना में शामिल 18 पारंपरिक व्यवसायों में से किसी एक में काम करना चाहिए और उसका काम असंगठित क्षेत्र में स्वरोजगार के आधार पर होना चाहिए। इसका मतलब है कि योजना मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है, जो स्वतंत्र रूप से अपना पारंपरिक काम करते हैं। उदाहरण के लिए, अपने घर या छोटी दुकान से कपड़े सिलने वाला दर्जी, लकड़ी का सामान बनाने वाला बढ़ई या अपने स्तर पर मिट्टी के बर्तन बनाने वाला कुम्हार पात्रता की अन्य शर्तें पूरी करने पर आवेदन कर सकता है।

PM Vishwakarma Yojana
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PM Vishwakarma Yojana में परिवार से जुड़ी एक महत्वपूर्ण शर्त भी है। इसके तहत एक परिवार के केवल एक सदस्य को पंजीकरण और लाभ की अनुमति है। यहां परिवार में पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे शामिल माने जाते हैं। इसके अलावा, सरकारी सेवा में कार्यरत व्यक्ति और उनके परिवार के सदस्य इस योजना के पात्र नहीं हैं।  एक अन्य महत्वपूर्ण शर्त पिछले पांच वर्षों में समान प्रकार की सरकारी ऋण योजनाओं से जुड़े लाभ पर लागू होती है। सामान्य नियम के अनुसार, स्वरोजगार या कारोबार के विकास के लिए केंद्र या राज्य सरकार की समान ऋण आधारित योजनाओं के तहत निर्धारित अवधि में ऋण लेने वाले आवेदकों पर पात्रता संबंधी प्रतिबंध लागू हो सकता है। हालांकि, कुछ मामलों में पहले लिए गए ऋण को पूरी तरह चुकाने के बाद पात्रता बन सकती है। इसलिए अपने मामले में लागू नियमों की पुष्टि आधिकारिक पोर्टल या कॉमन सर्विस सेंटर से जरूर करें।

किन 18 पारंपरिक व्यवसायों को योजना में शामिल किया गया है?

PM Vishwakarma Yojana में ऐसे पारंपरिक कामों को शामिल किया गया है, जिनमें हाथों और औजारों की मदद से वस्तुएं बनाने या सेवाएं देने का काम किया जाता है। लकड़ी से जुड़े कामों में बढ़ई और नाव बनाने वाले कारीगर शामिल हैं। धातु से जुड़े व्यवसायों में लोहार, औजार और टूलकिट बनाने वाले, ताला बनाने वाले तथा सुनार शामिल हैं।

मिट्टी और पत्थर से जुड़े कामों में कुम्हार, मूर्तिकार, पत्थर तराशने वाले और पत्थर तोड़ने वाले कारीगर शामिल हैं। इसके अलावा, मोची या जूते बनाने वाले कारीगर, राजमिस्त्री, पारंपरिक गुड़िया और खिलौने बनाने वाले, नाई, मालाकार, धोबी और दर्जी भी योजना के दायरे में आते हैं।

टोकरी बनाने वाले, चटाई बनाने वाले, झाड़ू बनाने वाले और कॉयर बुनने वाले कारीगरों को भी इसमें शामिल किया गया है। मछली पकड़ने के जाल बनाने वाले पारंपरिक कारीगर भी इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।

अगर आप इनमें से किसी पेशे से जुड़े हैं, तो अपनी पात्रता की जांच कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि पेशे का नाम सूची में होना ही पर्याप्त नहीं है। उम्र, स्वरोजगार, परिवार और ऋण संबंधी शर्तें भी पूरी करनी होंगी।

PM Vishwakarma Yojana में मिलते हैं कौन-कौन से फायदे?

PM Vishwakarma Yojana का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि कारीगरों को उनके काम में आगे बढ़ने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना भी है। इसी वजह से योजना में पहचान प्रमाणपत्र, कौशल प्रशिक्षण, औजार खरीदने के लिए प्रोत्साहन, रियायती ऋण और बाजार तक पहुंच बनाने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

पात्रता और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने पर लाभार्थी को पीएम विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और पहचान पत्र दिया जाता है। इससे पारंपरिक कारीगर को योजना के तहत मान्यता मिलती है और वह अन्य निर्धारित सुविधाओं का लाभ लेने के लिए पात्र बन सकता है।

कौशल विकास के तहत बेसिक ट्रेनिंग आम तौर पर पांच से सात दिनों की होती है। इच्छुक और पात्र लाभार्थी एडवांस ट्रेनिंग का विकल्प भी चुन सकते हैं, जिसकी अवधि 15 दिन या उससे अधिक हो सकती है। प्रशिक्षण के दौरान निर्धारित नियमों के अनुसार प्रतिदिन 500 रुपये का स्टाइपेंड दिया जाता है। इसका उद्देश्य कारीगरों को अपने कौशल को बेहतर बनाने और काम के नए तरीकों को समझने में मदद करना है।

PM Vishwakarma Yojana के तहत पात्र लाभार्थियों को आधुनिक औजार खरीदने के लिए 15,000 रुपये तक का टूलकिट प्रोत्साहन भी दिया जाता है। इससे कारीगर अपने काम के लिए उपयोगी उपकरण हासिल कर सकते हैं। हालांकि, यह सहायता निर्धारित प्रक्रिया और योजना के नियमों के अनुसार ही मिलती है।

अपना कारोबार बढ़ाने के लिए मिल सकता है ₹3 लाख तक का लोन

PM Vishwakarma Yojana का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कारोबार के विकास के लिए रियायती ऋण सुविधा है। इसके तहत पात्र लाभार्थियों को बिना गारंटी के कुल तीन लाख रुपये तक का एंटरप्राइज डेवलपमेंट लोन दो चरणों में मिल सकता है। पहले चरण में एक लाख रुपये तक का ऋण दिया जाता है, जिसकी भुगतान अवधि 18 महीने तक होती है। दूसरे चरण में पात्रता की शर्तें पूरी करने पर दो लाख रुपये तक का अतिरिक्त ऋण मिल सकता है, जिसकी भुगतान अवधि 30 महीने तक होती है।

इस ऋण पर लाभार्थी के लिए निर्धारित रियायती ब्याज दर पांच प्रतिशत है। सरकार की ओर से पात्र ऋणों पर ब्याज सहायता भी दी जाती है। पहले चरण का ऋण प्राप्त करने के लिए बेसिक ट्रेनिंग पूरी करना जरूरी है, जबकि दूसरे चरण के लिए पहले ऋण का संतोषजनक भुगतान और डिजिटल लेनदेन अपनाने या एडवांस ट्रेनिंग पूरी करने जैसी शर्तें लागू होती हैं।

यहां एक बात समझना जरूरी है कि तीन लाख रुपये की राशि हर आवेदक को एक साथ या बिना शर्त नहीं मिलती। ऋण की मंजूरी संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था के माध्यम से निर्धारित नियमों और पात्रता के आधार पर होती है। इसलिए इसे निश्चित नकद अनुदान के बजाय कारोबार के लिए उपलब्ध ऋण सुविधा के रूप में समझना चाहिए।

डिजिटल पेमेंट करने वाले कारीगरों को भी मिलता है प्रोत्साहन

आज के समय में छोटे कारोबारों के लिए डिजिटल भुगतान अपनाना उपयोगी हो सकता है। इससे ग्राहकों से भुगतान लेना और कारोबार के लेनदेन का रिकॉर्ड रखना आसान हो सकता है। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को निर्धारित डिजिटल लेनदेन पर प्रोत्साहन भी दिया जाता है।

योजना के अनुसार, पात्र डिजिटल भुगतान या प्राप्ति के लिए प्रति लेनदेन एक रुपये का प्रोत्साहन मिल सकता है। यह सुविधा अधिकतम 100 पात्र लेनदेन प्रति माह तक सीमित है और इसके लिए योजना की लागू शर्तों का पालन करना होता है।

इसके अलावा, सरकार कारीगरों को अपने उत्पादों की ब्रांडिंग, प्रचार और बिक्री के लिए बाजार से जोड़ने में भी सहायता देती है। व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे माध्यमों से पारंपरिक उत्पादों को अधिक ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिल सकता है। इस तरह योजना का उद्देश्य केवल कारीगर को आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि उसके काम की गुणवत्ता, उत्पादकता और बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने में मदद करना भी है।

PM Vishwakarma Yojana में आवेदन कैसे करें?

अगर आप PM Vishwakarma Yojana की पात्रता पूरी करते हैं, तो आवेदन के लिए अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर यानी CSC पर संपर्क कर सकते हैं। सरकारी जानकारी के अनुसार, योजना में पंजीकरण की प्रक्रिया CSC के माध्यम से पूरी की जाती है। आवेदन के दौरान आपकी पहचान और व्यवसाय से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाती है तथा निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया पूरी की जाती है।

पंजीकरण के लिए आधार कार्ड, आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जानकारी जैसे दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है। योजना की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राशन कार्ड भी पंजीकरण के लिए जरूरी दस्तावेजों में शामिल है। यदि परिवार के पास राशन कार्ड नहीं है, तो परिवार के सदस्यों के आधार कार्ड जैसे वैकल्पिक विवरण मांगे जा सकते हैं। दस्तावेजों की सटीक जरूरत अपने CSC से पहले ही पूछ लेना बेहतर होगा।

आवेदन जमा करने के बाद पात्रता की तीन स्तरों पर जांच होती है। पहले ग्राम पंचायत या शहरी स्थानीय निकाय के स्तर पर सत्यापन किया जाता है। इसके बाद जिला कार्यान्वयन समिति आवेदन की जांच और अनुशंसा करती है। अंतिम मंजूरी स्क्रीनिंग कमेटी की प्रक्रिया के अनुसार दी जाती है। इसलिए केवल आवेदन कर देने से योजना का लाभ मिलना सुनिश्चित नहीं हो जाता।

योजना की जानकारी और पंजीकरण से जुड़े निर्देशों के लिए आधिकारिक पोर्टल pmvishwakarma.gov.in देखा जा सकता है। आवेदन के लिए अनजान व्यक्तियों को पैसे देने या अपनी निजी जानकारी साझा करने से बचें। सही जानकारी के लिए अधिकृत CSC या सरकारी पोर्टल का ही उपयोग करें।

आवेदन करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

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पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ लेने के लिए सबसे पहले अपने पेशे की पात्रता जांचें। इसके बाद उम्र, स्वरोजगार और परिवार से जुड़ी शर्तों को समझें। यदि आपने पहले किसी सरकारी स्वरोजगार ऋण योजना का लाभ लिया है, तो उसकी तारीख, ऋण की स्थिति और भुगतान संबंधी जानकारी भी तैयार रखें। दस्तावेजों में नाम, मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जानकारी सही होना जरूरी है। आवेदन जमा करने के बाद आवेदन संख्या संभालकर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर उसकी स्थिति की जानकारी प्राप्त की जा सके। किसी भी लाभ की मंजूरी से पहले आधिकारिक सत्यापन पूरा होना आवश्यक है। योजना का लाभ तभी उपयोगी होगा, जब आवेदक इसकी शर्तों को समझकर सही प्रक्रिया से आवेदन करे। इसलिए किसी भी एजेंट के दावे पर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक पोर्टल या अधिकृत CSC से जानकारी लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

डिस्क्लेमर: यह लेख पीएम विश्वकर्मा योजना की उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। पात्रता, ऋण मंजूरी, दस्तावेज और लाभ वितरण योजना के लागू नियमों तथा संबंधित अधिकारियों के सत्यापन पर निर्भर करते हैं। आवेदन करने से पहले आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत कॉमन सर्विस सेंटर से नवीनतम जानकारी की पुष्टि जरूर करें।

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