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Harmanpreet Kaur Emotional Interview: 41 गेंदों में नाबाद 91 रन, लाइव टीवी पर छलके आंसू; कप्तानी छोड़ने के बाद क्या बदल गया?

On: October 21, 2026 12:33 PM
Harmanpreet Kaur

Harmanpreet Kaur: कभी-कभी मैदान पर बल्ले से निकले रन सिर्फ एक स्कोर नहीं होते, बल्कि उन मुश्किल दिनों की कहानी भी कहते हैं, जिनसे गुजरकर कोई खिलाड़ी दोबारा अपनी लय हासिल करता है। भारतीय महिला क्रिकेट की अनुभवी बल्लेबाज हरमनप्रीत कौर के साथ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे और आखिरी T20I मुकाबले में उन्होंने ऐसी पारी खेली, जिसने क्रिकेट प्रशंसकों का ध्यान खींच लिया। लेकिन इस पारी के बाद लाइव टीवी पर उनका भावुक होना भी चर्चा का विषय बन गया।

हरमनप्रीत ने सिर्फ 41 गेंदों में नाबाद 91 रन बनाए। उनकी पारी में 10 चौके और 5 छक्के शामिल रहे। मैदान पर लंबे समय बाद उनका यह आक्रामक अंदाज देखने को मिला, लेकिन जब पारी के ब्रेक के दौरान उनसे बातचीत की गई, तो वह अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाईं। उनकी आंखों में आंसू आ गए और बातचीत के दौरान उन्होंने उन लोगों का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने मुश्किल दौर में उनका साथ दिया।

पिछले कुछ मैचों से रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहीं हरमनप्रीत के लिए यह पारी खास थी। वह अपने पिछले 10 मैचों में एक भी अर्धशतक नहीं लगा पाई थीं। ऐसे में जिम्बाब्वे के खिलाफ उनकी वापसी ने एक बार फिर दिखाया कि क्रिकेट में खराब दौर के बाद भी मेहनत और आत्मविश्वास के सहारे वापसी की जा सकती है।

जिम्बाब्वे के खिलाफ हरमनप्रीत कौर की तूफानी पारी

भारत और जिम्बाब्वे के बीच खेले गए तीसरे और आखिरी T20I मुकाबले में हरमनप्रीत कौर ने शानदार बल्लेबाजी की। उन्होंने 41 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 91 रन बनाए। उनकी पारी में 10 चौके और 5 छक्के शामिल थे। उन्होंने मैदान के अलग-अलग हिस्सों में शॉट लगाए और गेंदबाजों पर दबाव बनाया। इस पारी की खास बात सिर्फ रन बनाने की रफ्तार नहीं थी, बल्कि वह आत्मविश्वास भी था जो उनकी बल्लेबाजी में दिखाई दिया। हरमनप्रीत ने कई मौकों पर गेंद को सीधे मैदान के सामने की तरफ शानदार तरीके से खेला। उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता के साथ-साथ गेंद को सही समय पर हिट करने की क्षमता भी नजर आई।

Harmanpreet Kaur
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जो खिलाड़ी पिछले कई मैचों से बड़ी पारी खेलने के लिए जूझ रही थी, उसी के बल्ले से अचानक ऐसी पारी निकली। इसीलिए यह प्रदर्शन उनके लिए भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा। लंबे समय तक रन नहीं बनने पर किसी भी बल्लेबाज के मन में सवाल उठ सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दबाव और अपेक्षाएं इस चुनौती को और कठिन बना देती हैं। हरमनप्रीत की 91 रनों की पारी ने उन्हें अपनी पुरानी लय की झलक दिखाई। हालांकि, एक पारी के आधार पर पूरे फॉर्म की वापसी का फैसला करना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह प्रदर्शन उनके आत्मविश्वास के लिए अहम साबित हो सकता है।

लाइव टीवी पर क्यों भावुक हो गईं हरमनप्रीत कौर?

मैदान पर शानदार पारी खेलने के बाद हरमनप्रीत कौर जब लाइव टीवी पर बातचीत करने आईं, तो शुरुआत में वह सामान्य दिखाई दीं। लेकिन बातचीत आगे बढ़ी और उन्होंने अपने संघर्ष तथा सहयोग करने वाले लोगों के बारे में बात की, तो वह भावुक हो गईं।

यह इंटरव्यू उनके लिए इसलिए भी खास था, क्योंकि इसी महीने उन्होंने भारतीय महिला टीम की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया था। कप्तानी के साथ किसी भी खिलाड़ी पर अपनी व्यक्तिगत बल्लेबाजी के अलावा पूरी टीम के प्रदर्शन की जिम्मेदारी भी होती है। हर मैच में फैसलों, रणनीति और परिणामों को लेकर कप्तान पर अतिरिक्त ध्यान रहता है।

हरमनप्रीत ने बातचीत में बताया कि अब वह मैदान पर जाकर अपने खेल का आनंद लेना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि अब उन पर पहले जैसा दबाव महसूस नहीं हो रहा है और वह अपने खेल को एंजॉय करना चाहती हैं।

उनकी बातों से यह स्पष्ट हुआ कि उनके लिए क्रिकेट सिर्फ रन बनाने का खेल नहीं है। इसके साथ भावनाएं, मेहनत, उम्मीदें और मुश्किल समय में मिलने वाला समर्थन भी जुड़ा हुआ है। जब कोई खिलाड़ी लंबे समय तक संघर्ष करता है और फिर मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करता है, तो उस पल के पीछे की भावनाएं स्वाभाविक रूप से सामने आ सकती हैं।

हरमनप्रीत का भावुक होना उनके लिए बीते समय की कठिनाइयों और वापसी की खुशी से जुड़ा एक निजी क्षण था। इसे किसी एक कारण तक सीमित करने के बजाय उनके पूरे क्रिकेट सफर और उस समय की परिस्थितियों के संदर्भ में समझना चाहिए।

कप्तानी छोड़ने के बाद क्या बदल गया?

हरमनप्रीत कौर ने इसी महीने भारतीय महिला टीम की कप्तानी छोड़ दी थी। वह अलग-अलग फॉर्मेट में टीम की कप्तानी कर रही थीं और इस जिम्मेदारी के साथ उनका लंबा सफर रहा है। कप्तानी से हटने के बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली गई उनकी यह पारी खास चर्चा में आ गई।

हरमनप्रीत ने इंटरव्यू के दौरान संकेत दिया कि अब वह बिना अतिरिक्त कप्तानी के दबाव के अपने खेल पर ध्यान देना चाहती हैं। उनके मुताबिक, मैदान पर जाकर खेल का आनंद लेना उनके लिए महत्वपूर्ण है।

कप्तान की भूमिका में खिलाड़ी को अपने प्रदर्शन के साथ टीम के खिलाड़ियों, मैच की परिस्थितियों और रणनीतिक फैसलों पर भी ध्यान देना पड़ता है। बल्लेबाजी करते समय भी टीम की स्थिति और लक्ष्य का दबाव उसके फैसलों को प्रभावित कर सकता है। कप्तानी से हटने के बाद हरमनप्रीत के पास अपनी बल्लेबाजी और व्यक्तिगत तैयारी पर अधिक ध्यान देने का अवसर हो सकता है।

हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि उनकी खराब फॉर्म का एकमात्र कारण कप्तानी का दबाव था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में फॉर्म पर तकनीक, परिस्थितियों, विरोधी टीम की रणनीति, फिटनेस और मानसिक तैयारी जैसे कई कारकों का असर पड़ता है। हरमनप्रीत की अपनी बातों से इतना जरूर समझ आता है कि वह अब मैदान पर खेल का आनंद लेने और अपनी बल्लेबाजी को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहती हैं।

जिम्बाब्वे के खिलाफ उनकी पारी इसी नए दौर की एक महत्वपूर्ण शुरुआत के रूप में देखी जा सकती है। आने वाले मुकाबलों में उनका प्रदर्शन बताएगा कि यह लय कितनी निरंतर बनी रहती है।

WV Raman की सलाह का हरमनप्रीत पर पड़ा असर

लाइव इंटरव्यू के दौरान हरमनप्रीत कौर ने पूर्व भारतीय महिला टीम के कोच WV Raman का भी आभार जताया। उन्होंने बताया कि जब Raman उनके पास आए, तो उन्होंने उनसे कहा कि अब वह वही करें जो वह करना चाहती हैं।

हरमनप्रीत के अनुसार, Raman ने उन्हें अपने खेल का आनंद लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बातचीत में यह भी कहा कि इस सलाह का उनके लिए महत्व रहा और वह इसके लिए आभारी हैं।

कई बार किसी खिलाड़ी को तकनीकी मार्गदर्शन के साथ ऐसे सहयोग की भी जरूरत होती है, जो उसे अपने खेल पर भरोसा करने में मदद करे। जब लगातार रन नहीं बनते, तो बल्लेबाज अपने फैसलों और तकनीक को लेकर अधिक सोचने लग सकता है। ऐसे समय में किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह खिलाड़ी को अपने स्वाभाविक खेल पर लौटने का अवसर दे सकती है।

हरमनप्रीत की पारी के बाद Raman को धन्यवाद देना इसी समर्थन के महत्व को सामने लाता है। हालांकि, उनकी पारी को केवल एक व्यक्ति की सलाह का परिणाम कहना सही नहीं होगा। इसमें खिलाड़ी की अपनी तैयारी, अभ्यास और मैदान पर किए गए फैसलों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

हर दिन पांच घंटे नेट्स में अभ्यास कर रही थीं हरमनप्रीत

हरमनप्रीत कौर ने अपनी वापसी का श्रेय सिर्फ मानसिक बदलाव को नहीं दिया, बल्कि कड़ी मेहनत और अभ्यास को भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। रिपोर्ट के अनुसार, जिम्बाब्वे सीरीज से पहले उन्होंने नेट्स में काफी समय बिताया और हर दिन लगभग पांच घंटे अभ्यास किया।

उन्होंने बताया कि सीरीज से पहले उन्होंने अलग-अलग ड्रिल्स पर काम किया, ताकि वह परिस्थितियों के अनुसार खुद को तैयार कर सकें। लगातार अभ्यास करने का उद्देश्य अपनी बल्लेबाजी में सहजता लाना और परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर प्रदर्शन करना था।

क्रिकेट में नेट प्रैक्टिस केवल गेंदों का सामना करने तक सीमित नहीं होती। बल्लेबाज अलग-अलग तरह की गेंदों, शॉट्स, टाइमिंग और परिस्थितियों पर काम करते हैं। मैच के दौरान जिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है, उनके लिए अभ्यास में तैयारी करना प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

हरमनप्रीत ने अपने बल्लेबाजी कोच हिमांशु भैया का भी विशेष रूप से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उनके कोच ने उन पर काफी मेहनत की है और जिम्बाब्वे के खिलाफ उनकी बल्लेबाजी में उस अभ्यास का योगदान रहा।

उनकी 91 रनों की पारी इस बात की याद दिलाती है कि दर्शकों को मैदान पर जो शानदार शॉट दिखाई देते हैं, उनके पीछे अक्सर कई घंटे की तैयारी होती है। किसी खिलाड़ी की वापसी एक दिन में दिखाई दे सकती है, लेकिन उस प्रदर्शन की नींव लगातार किए गए अभ्यास से बनती है।

हरमनप्रीत ने यह भी कहा कि अब उन्हें अपनी फिटनेस पर काम करते रहना है और नेट्स में मेहनत जारी रखनी है। इससे साफ है कि वह इस पारी को अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि आगे की तैयारी का एक हिस्सा मान रही हैं।

पिछले 10 मैचों से अर्धशतक का इंतजार कर रही थीं हरमनप्रीत

जिम्बाब्वे के खिलाफ पारी खेलने से पहले हरमनप्रीत का बल्ला अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रहा था। वह अपने पिछले 10 मैचों में अर्धशतक नहीं बना सकी थीं। महिला T20 एशिया कप और एशियन गेम्स के दौरान भी उनका व्यक्तिगत प्रदर्शन चर्चा के केंद्र में नहीं रहा, हालांकि भारतीय टीम ने इन दोनों प्रतियोगिताओं में खिताब जीते थे।

किसी टीम की जीत और किसी खिलाड़ी की व्यक्तिगत फॉर्म हमेशा एक जैसी नहीं चलती। टीम अच्छा प्रदर्शन कर सकती है, लेकिन उसके किसी अनुभवी खिलाड़ी के लिए रन बनाना मुश्किल हो सकता है। हरमनप्रीत के साथ भी इसी तरह की स्थिति रही।

एक अनुभवी अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाज से दर्शकों और टीम को काफी उम्मीदें रहती हैं। जब लगातार बड़ी पारी नहीं आती, तो उसकी बल्लेबाजी पर सवाल उठने लगते हैं। ऐसे माहौल में खिलाड़ी के लिए अपनी तैयारी पर भरोसा बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है।

हरमनप्रीत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ नाबाद 91 रन बनाकर लंबे समय से चले आ रहे अर्धशतक के इंतजार को खत्म किया। उनकी इस पारी ने यह भी दिखाया कि पिछली असफलताओं के बावजूद वह बड़े शॉट लगाने और मैच में प्रभाव छोड़ने की क्षमता रखती हैं।

अब उनके सामने चुनौती इस प्रदर्शन को आगे भी जारी रखने की होगी। क्रिकेट में निरंतरता हासिल करना किसी एक बड़ी पारी से अधिक कठिन हो सकता है, इसलिए आने वाली सीरीज उनके लिए महत्वपूर्ण होगी।

भारत-जिम्बाब्वे ODI सीरीज पर रहेंगी नजरें

T20I सीरीज के बाद भारत और जिम्बाब्वे की टीमें 23 अक्टूबर से ODI सीरीज में आमने-सामने होंगी। इस सीरीज में हरमनप्रीत के प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी, क्योंकि T20 मुकाबले में मिली लय को वह लंबे फॉर्मेट में किस तरह आगे बढ़ाती हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।

T20 क्रिकेट में बल्लेबाज को कम गेंदों में तेजी से रन बनाने होते हैं, जबकि ODI में पारी को संभालने, परिस्थितियों को समझने और जरूरत के अनुसार गति बदलने की चुनौती होती है। हरमनप्रीत के अनुभव को देखते हुए उनके पास दोनों फॉर्मेट की मांग के अनुसार अपनी बल्लेबाजी ढालने का अवसर होगा।

हालांकि, 91 रनों की पारी के बाद अगली सीरीज में भी बड़े स्कोर की गारंटी नहीं दी जा सकती। हर मुकाबला नई परिस्थितियां लेकर आता है और खिलाड़ी को हर बार नए सिरे से तैयारी करनी होती है।

फिलहाल, जिम्बाब्वे के खिलाफ उनकी पारी ने एक सकारात्मक संकेत जरूर दिया है। कप्तानी छोड़ने के बाद अपने खेल का आनंद लेने की बात कहने वाली हरमनप्रीत अब अपनी फिटनेस, नेट प्रैक्टिस और बल्लेबाजी पर ध्यान देने की योजना बना रही हैं।

हरमनप्रीत कौर की पारी से क्या सीख मिलती है?

हरमनप्रीत कौर की कहानी सिर्फ 41 गेंदों में 91 रन बनाने तक सीमित नहीं है। यह उस दौर की भी कहानी है, जब एक अनुभवी खिलाड़ी लगातार अच्छा स्कोर बनाने के लिए संघर्ष कर रही थी और फिर मेहनत के दम पर उसने शानदार वापसी की। उनका अनुभव बताता है कि खराब फॉर्म किसी खिलाड़ी की पूरी क्षमता को परिभाषित नहीं करती। लगातार अभ्यास, सही मार्गदर्शन और अपनी तैयारी पर भरोसा बनाए रखना खेल में महत्वपूर्ण है। साथ ही, कठिन समय में मिलने वाला समर्थन खिलाड़ी को आगे बढ़ने में मदद कर सकता है।

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लाइव टीवी पर भावुक होना भी इसी यात्रा का एक हिस्सा था। लंबे समय तक अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के बाद जब मेहनत का असर मैदान पर दिखाई देता है, तो राहत और खुशी की भावनाएं सामने आ सकती हैं। अब हरमनप्रीत के सामने आगे बढ़ने और इस लय को बनाए रखने की चुनौती है। ODI सीरीज में उनका प्रदर्शन बताएगा कि जिम्बाब्वे के खिलाफ मिली सफलता को वह किस तरह आगे बढ़ाती हैं। भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए फिलहाल उनकी नाबाद 91 रनों की पारी और उसके बाद आया भावुक पल इस सीरीज की यादगार घटनाओं में शामिल हो गया है।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और हरमनप्रीत कौर के सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। कप्तानी छोड़ने, व्यक्तिगत फॉर्म और भावनात्मक प्रतिक्रिया से जुड़े किसी भी निष्कर्ष को उनके बयानों और रिपोर्ट किए गए तथ्यों के संदर्भ में ही समझें। एक पारी के आधार पर भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं दी जा सकती। मैच और आगामी सीरीज से जुड़ी जानकारी में बदलाव होने पर आधिकारिक क्रिकेट अपडेट्स को प्राथमिकता दें।

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