Driving Licence New Rules: आप ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए नियमों से जुड़ी एक अहम खबर है। भारत सरकार ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया को अधिक सख्त और सुविधाजनक बनाने की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय यानी MoRTH ने Central Motor Vehicles Rules, 1989 में बदलाव करने के लिए एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत लर्नर लाइसेंस के सेफ ड्राइविंग ट्यूटोरियल असेसमेंट में पास होने के लिए जरूरी अंक 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।
इसका मतलब है कि अगर यह प्रस्ताव अंतिम नियमों में शामिल हो जाता है, तो आवेदकों को पहले के मुकाबले ज्यादा अंक हासिल करने होंगे। इसके साथ ही सेफ ड्राइविंग ट्यूटोरियल कम से कम 30 मिनट का करना, ड्राइविंग लाइसेंस पर अतिरिक्त जानकारी दर्ज करना, भारतीय और विदेशी नागरिकों के लिए अलग लाइसेंस फॉर्मेट और कुछ लाइसेंस सेवाओं को मुफ्त बनाने जैसे बदलाव भी प्रस्तावित हैं।
हालांकि, सबसे जरूरी बात यह है कि ये अभी प्रस्तावित बदलाव हैं। इन्हें अंतिम रूप देकर लागू किए जाने तक मौजूदा नियमों में बदलाव मानकर नहीं चलना चाहिए। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि नए ड्राफ्ट में क्या कहा गया है और इसका आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है।
लर्नर लाइसेंस टेस्ट में 60% की जगह 75% अंक लाने होंगे
MoRTH के प्रस्ताव में सबसे बड़ा बदलाव लर्नर लाइसेंस से जुड़े सेफ ड्राइविंग ट्यूटोरियल के असेसमेंट में पासिंग मार्क्स बढ़ाने का है। अभी इस असेसमेंट में पास होने के लिए 60 प्रतिशत अंक जरूरी हैं, लेकिन नए ड्राफ्ट में इसे बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने की बात कही गई है। इस बदलाव का मकसद सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों और सुरक्षित ड्राइविंग की जानकारी को ज्यादा गंभीरता से लेना हो सकता है। ड्राइविंग केवल गाड़ी चलाना सीखने तक सीमित नहीं है। सड़क संकेतों को समझना, ट्रैफिक नियमों का पालन करना, दूसरे वाहन चालकों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना और जोखिम वाली परिस्थितियों में सही फैसला लेना भी उतना ही जरूरी है।

अगर पासिंग मार्क्स बढ़ाने का प्रस्ताव लागू होता है, तो नए आवेदकों को ट्यूटोरियल के दौरान दी गई जानकारी को ध्यान से समझना होगा। केवल औपचारिक रूप से प्रक्रिया पूरी कर लेना पर्याप्त नहीं होगा। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि असेसमेंट किस तरह आयोजित किया जाता है और आवेदकों को तैयारी के लिए कितनी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
सेफ ड्राइविंग ट्यूटोरियल कम से कम 30 मिनट का होगा
पासिंग मार्क्स बढ़ाने के साथ-साथ मंत्रालय ने सेफ ड्राइविंग ट्यूटोरियल की न्यूनतम अवधि भी तय करने का प्रस्ताव दिया है। ड्राफ्ट के अनुसार, इस ट्यूटोरियल की अवधि कम से कम 30 मिनट होनी चाहिए। इसके अलावा, आवेदन करने के बाद इसे पूरा करने की समय-सीमा मौजूदा सात दिनों से बढ़ाकर 15 दिन करने का प्रस्ताव है।
इसका उद्देश्य आवेदकों को सड़क सुरक्षा की जानकारी लेने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया उपलब्ध कराना है। ट्यूटोरियल में सुरक्षित ड्राइविंग की आदतें, ट्रैफिक संकेत और सड़क पर जिम्मेदारी से व्यवहार करने जैसी जानकारियां महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
आवेदकों के लिए यह समझना जरूरी है कि लर्नर लाइसेंस मिलने का मतलब यह नहीं है कि वे बिना नियमों का पालन किए सड़क पर वाहन चला सकते हैं। लर्नर लाइसेंस के साथ लागू शर्तों का पालन करना और ड्राइविंग के दौरान सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
ड्राफ्ट में ट्यूटोरियल पूरा करने की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव भी है, इसलिए आवेदन करने वालों को प्रक्रिया पूरी करने के लिए थोड़ा अधिक समय मिल सकता है। लेकिन जब तक अंतिम नियम जारी नहीं होते, तब तक इसे लागू व्यवस्था नहीं समझना चाहिए।
ड्राइविंग लाइसेंस पर दर्ज जानकारी में हो सकते हैं बदलाव
MoRTH के प्रस्ताव में ड्राइविंग लाइसेंस पर दर्ज होने वाली जानकारी को लेकर भी बदलाव सुझाए गए हैं। इसके तहत लाइसेंस पर रक्त समूह यानी Blood Group, मोबाइल नंबर और आपातकालीन संपर्क नंबर जैसी जानकारी अनिवार्य रूप से शामिल करने का प्रस्ताव है। ड्राफ्ट फॉर्म में स्वास्थ्य से संबंधित कुछ जानकारियां और अंगदान के प्रति आवेदक की इच्छा से जुड़ा विवरण भी शामिल करने की बात सामने आई है।
इन जानकारियों का महत्व किसी आपातकालीन स्थिति में बढ़ सकता है। उदाहरण के लिए, सड़क दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति की पहचान या उसके आपातकालीन संपर्क तक पहुंचने में सही जानकारी उपयोगी हो सकती है। हालांकि, इन विवरणों का इस्तेमाल किस परिस्थिति में और किस प्रक्रिया के तहत किया जाएगा, यह अंतिम नियमों और संबंधित प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
यह भी जरूरी है कि लाइसेंस पर दर्ज व्यक्तिगत और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को उचित तरीके से सुरक्षित रखा जाए। ड्राफ्ट में QR कोड के जरिए लाइसेंस की जानकारी सत्यापित करने की व्यवस्था से जुड़े बदलाव भी प्रस्तावित हैं। इससे दस्तावेज की जांच में सुविधा मिल सकती है, लेकिन डेटा की सुरक्षा और अधिकृत पहुंच भी महत्वपूर्ण विषय होंगे।
स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना भी हो सकता है जरूरी
नए ड्राफ्ट में ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन से जुड़े मेडिकल सवालों का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव है। आवेदकों से देखने की क्षमता, रात में देखने में परेशानी, सुनने से जुड़ी समस्या और हाथ-पैर की कार्यक्षमता को प्रभावित करने वाली स्थितियों के बारे में जानकारी मांगी जा सकती है। दवा या अन्य पदार्थों से एलर्जी, मेडिकल इम्प्लांट और कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियों से जुड़े सवाल भी प्रस्तावित फॉर्म में शामिल हैं।
ड्राफ्ट में मिर्गी या सीजर डिसऑर्डर से जुड़ा सवाल भी शामिल बताया गया है। इस विषय पर मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि प्रस्तावित फॉर्म में संबंधित स्थिति और दवा लेने के बारे में जानकारी मांगी जा सकती है। हालांकि, स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी स्थिति में लाइसेंस पात्रता का फैसला करते समय अंतिम नियमों के सटीक शब्दों और लागू मेडिकल मानकों को देखना जरूरी होगा।
ऐसी जानकारी का उद्देश्य आवेदक की ड्राइविंग से जुड़ी सुरक्षा और मेडिकल जरूरतों को समझना हो सकता है। साथ ही, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के आधार पर लिए जाने वाले निर्णय स्पष्ट, उचित और लागू नियमों के अनुरूप होने चाहिए। आवेदकों को केवल किसी बीमारी का नाम देखकर अपने स्तर पर यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि वे लाइसेंस के पात्र हैं या नहीं। अंतिम प्रावधान और संबंधित मेडिकल प्रक्रिया की पुष्टि आधिकारिक अधिसूचना से करना जरूरी होगा।
भारतीय और विदेशी नागरिकों के ड्राइविंग लाइसेंस का फॉर्मेट अलग होगा
मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों और विदेशी नागरिकों को जारी किए जाने वाले ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अलग-अलग फॉर्मेट और रंग योजना का प्रस्ताव भी रखा है। इसके तहत लाइसेंस लैमिनेटेड कार्ड या PVC कार्ड के रूप में जारी किए जाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। यह बदलाव लाइसेंस की पहचान और दस्तावेजों की जांच को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में उठाया गया कदम हो सकता है।
ड्राफ्ट के अनुसार, लाइसेंस Form 7 में जारी किया जाएगा और भारतीय तथा विदेशी नागरिकों के लिए अलग प्रारूप निर्धारित किए जाएंगे। विदेशी नागरिकों के मामले में भारत में कानूनी रूप से मौजूद होने से जुड़े प्रमाण की जरूरत भी दस्तावेजी प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है।
हालांकि, अलग रंग या डिजाइन होने का मतलब अपने आप अलग ड्राइविंग अधिकार नहीं है। लाइसेंस की वैधता, वाहन श्रेणी और अन्य शर्तें संबंधित नियमों के अनुसार ही तय होंगी। इन बदलावों का वास्तविक स्वरूप अंतिम अधिसूचना में स्पष्ट होगा।
नाम और पता बदलवाने की प्रक्रिया हो सकती है मुफ्त
ड्राइविंग लाइसेंस में नाम, पता या अन्य व्यक्तिगत जानकारी बदलवाने के लिए लोगों को आवेदन और फीस से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। नए ड्राफ्ट में कुछ बदलावों के लिए शुल्क हटाने का प्रस्ताव दिया गया है। इनमें नाम और अन्य व्यक्तिगत विवरणों में सुधार तथा पता, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी अपडेट करने जैसी सेवाएं शामिल बताई गई हैं। इसके अलावा, आधार आधारित ऑनलाइन प्रमाणीकरण के जरिए ली जाने वाली कुछ लाइसेंस सेवाओं पर भी फीस माफ करने का प्रस्ताव है।
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो लाइसेंस धारकों को अपने रिकॉर्ड में बदलाव करवाने के लिए कम खर्च करना पड़ सकता है। खास तौर पर उन लोगों को सुविधा मिल सकती है जिनका पता बदल गया है या जिनके लाइसेंस में नाम की स्पेलिंग अथवा दूसरी व्यक्तिगत जानकारी ठीक करवानी है।
यहां एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि शुल्क माफी का दायरा प्रस्ताव में शामिल सेवाओं और अंतिम नियमों पर निर्भर करेगा। इसलिए हर लाइसेंस सेवा को मुफ्त मान लेना सही नहीं होगा। आवेदन करने से पहले संबंधित सरकारी पोर्टल पर लागू शुल्क और दस्तावेजों की जांच करना बेहतर रहेगा।
लाइसेंस में बदलाव के आवेदन पर 15 दिन में फैसला करने का प्रस्ताव
फीस में संभावित राहत के साथ ही मंत्रालय ने लाइसेंस के विवरण में बदलाव के लिए समय-सीमा तय करने का प्रस्ताव भी रखा है। इसके तहत संबंधित अधिकारी को नाम या अन्य विवरण बदलने के आवेदन पर 15 दिनों के भीतर मंजूरी देने या अस्वीकार करने का फैसला करना होगा। यदि आवेदन खारिज किया जाता है, तो उसका कारण बताने का भी प्रस्ताव है।
पते में बदलाव के लिए ड्राफ्ट में एक अलग प्रावधान भी प्रस्तावित है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, यदि अधिकारी निर्धारित 30 दिनों के भीतर आवेदन को मंजूर या खारिज नहीं करते, तो कुछ शर्तों के तहत आवेदन को स्वीकृत माना जा सकता है। इस व्यवस्था का अंतिम स्वरूप और लागू होने की शर्तें आधिकारिक नियमों से ही स्पष्ट होंगी।
ऐसी समय-सीमा का फायदा यह हो सकता है कि आवेदकों को अपने आवेदन की स्थिति को लेकर अनिश्चितता कम हो। हालांकि, इसके लिए आवेदन में सही जानकारी और जरूरी दस्तावेज देना भी महत्वपूर्ण रहेगा।
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए कौन-से दस्तावेज स्वीकार हो सकते हैं?
ड्राफ्ट में पहचान, उम्र और पते के प्रमाण के लिए स्वीकार किए जाने वाले दस्तावेजों की सूची में भी बदलाव प्रस्तावित हैं। इनमें आधार कार्ड, पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र, ई-राशन कार्ड और कुछ सरकारी सेवा या पेंशन से जुड़े पहचान दस्तावेज शामिल हैं। जन्म प्रमाणपत्र और निर्धारित शर्तों के अनुसार अन्य दस्तावेज भी संबंधित श्रेणी के लिए स्वीकार किए जा सकते हैं।
पते के प्रमाण के लिए तीन महीने से पुराना न होने वाला बिजली बिल या घरेलू गैस बिल भी प्रस्तावित सूची में शामिल है। विदेशी आवेदकों के मामले में भारत में कानूनी मौजूदगी का प्रमाण भी जरूरी हो सकता है।
आवेदन से पहले यह देखना जरूरी है कि दस्तावेज किस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। पहचान का प्रमाण और जन्मतिथि का प्रमाण हमेशा एक ही दस्तावेज से पूरा हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए संबंधित सेवा के लिए मांगे गए दस्तावेजों की सूची आधिकारिक पोर्टल पर देखना बेहतर होगा।
ड्राइविंग लाइसेंस के नए नियम कब से लागू होंगे?
MoRTH ने Central Motor Vehicles Rules, 1989 में संशोधन के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसे 21 अक्टूबर 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया और इसमें आम लोगों तथा संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। नोटिफिकेशन के मुताबिक, प्रकाशन के बाद 30 दिनों की अवधि में सुझाव दिए जा सकते हैं। इसके बाद सरकार प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार करके अंतिम नियमों को अधिसूचित कर सकती है।

इसका अर्थ है कि 75 प्रतिशत पासिंग मार्क्स, फीस में राहत, अलग लाइसेंस फॉर्मेट और मेडिकल जानकारी से जुड़े सभी प्रस्तावों को फिलहाल अंतिम नियम नहीं समझना चाहिए। अंतिम अधिसूचना जारी होने पर ही स्पष्ट होगा कि कौन-से बदलाव स्वीकार किए गए हैं और वे कब से प्रभावी होंगे। यदि आप जल्द ही लर्नर लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले हैं, तो आवेदन के समय लागू नियमों की जांच करें। इसी तरह, मौजूदा ड्राइविंग लाइसेंस धारकों को भी केवल खबरों के आधार पर तुरंत कोई बदलाव कराने की जरूरत नहीं है।
डिस्क्लेमर: यह लेख MoRTH के प्रस्तावित संशोधनों और अक्टूबर 2026 में उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें बताई गई व्यवस्थाएं अभी ड्राफ्ट प्रस्ताव हैं और इन्हें अंतिम रूप में लागू नियम नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक प्रावधान, पात्रता, शुल्क और लागू होने की तारीख के लिए आधिकारिक सरकारी अधिसूचना देखें
Also Read:
Jailer 2 Review: रजनीकांत की दमदार वापसी, एक्शन और स्वैग के साथ कैसी है फिल्म
Arunachal Pradesh सीमा पर तनाव के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब





